बापू हरभगवान जी महाराज
पवित्र ग्रंथों के लेखक और नंदाचौर धाम में नए दरबार, संगत निवास और लंगर घर के निर्माता।
संक्षिप्त जीवनी तथ्य
दिव्य जीवन यात्रा
बापू हरभगवान जी महाराज का जन्म 15 जून 1936 को गाँव मंडी तंदिलायवाला, जिला लायलपुर (अब पाकिस्तान में) में श्री जयगोपाल जी जग्गा और श्रीमती जमुना देवी जी के घर हुआ। बचपन से ही उन्होंने आध्यात्मिकता और निस्वार्थ सेवा के प्रति गहरा झुकाव प्रदर्शित किया।
उन्होंने बापू दयाकिशन जी महाराज से नाम दीक्षा प्राप्त की और अपना जीवन संगत और दरबार की सेवा को समर्पित कर दिया। उनका साहित्यिक योगदान उल्लेखनीय है — उन्होंने पवित्र ग्रंथ श्री ॐ नारायण चरितामृत की रचना की और श्री हंस चमत्कार का हिंदी अनुवाद किया, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए आध्यात्मिक विरासत संरक्षित हुई।
बापू हरभगवान जी महाराज एक महत्वपूर्ण निर्माता और संगठनकर्ता के रूप में स्मरण किए जाते हैं। उनके मार्गदर्शन में नए संगत निवास, नए लंगर घर और श्री ॐ दरबार नंदाचौर के नए भवन का निर्माण हुआ। उन्होंने नंदाचौर में एक नए विद्यालय के निर्माण की देखरेख भी की और मेहतपुर, मेरठ तथा रुद्रपुर में नए दरबारों की स्थापना की। 11 फरवरी 2019 को वे ज्योती ज्योत समा गए।
श्री ॐ नारायण चरितामृत
पवित्र ग्रंथश्री हंस चमत्कार (हिंदी अनुवाद)
पवित्र ग्रंथ (अनुवाद)श्री ॐ नारायण पावन गाथा
कथाएं / जीवनी ग्रंथआत्मकथा बापू हरनाम जी महाराज
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दर्शन और प्रवचन